गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी को क़रारा जवाब दिया। पिछले 8 दिन से दिल्ली में हो रहे प्रोटेस्ट के बाद पहली बार अमित शाह का बयान आया। अमित शाह ने राहुल गांधी को नसीहत दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को SIR से जोड़ने की बजाए उन्हें आत्ममंथन करना चाहिए। अमित शाह ने बताया, कैसे गुजरात में कांग्रेस पिछले 41 साल से एक भी चुनाव नहीं जीत पाई। अमित शाह ने कहा कि 2029 में भी मोदी के नेतृत्व में बीजेपी और NDA की जीत होगी और राहुल गांधी को अभी से हार का मन बना लेना चाहिए।
गुजरात में स्थानीय निकाय के चुनाव के नतीजे एक बात साबित करते हैं कि राहुल गांधी के campaign का ground पर कोई असर नहीं पड़ा। किसी भी नेता या पार्टी की लोकप्रियता का पैमाना चुनाव होते हैं। इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि उसके ख़िलाफ़ कितनी reels बनती हैं, सोशल मीडिया में कैसा campaign चलता है। अमित शाह के संसदीय क्षेत्र गांधीनगर में BJP की एकतरफ़ा जीत इस बात का सबूत है कि नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता बरक़रार है।
पिछले हफ़्ते असम और पश्चिम बंगाल में भी ऐसे ही नतीजे आए थे। चुनाव का नतीजा किसी भी राजनीतिक दल के internal assessment से या किसी भी opinion poll से ज़्यादा authentic proof होता है। लोकतंत्र में इससे बड़ा सबूत और क्या हो सकता है? अमित शाह ने ऐसे कई proof दिए, वो राज्य गिनाए जहां कांग्रेस 30-30 साल से 40-40 साल से, चुनाव नहीं जीत पाई। तब तो वहां कोई ज्ञानेश कुमार नहीं थे। अमित शाह ने ठीक कहा 8000 की भीड़ का शोर ज़मीनी हक़ीक़त को नहीं बदल सकता।
पीयूष गोयल ने कांग्रेस को क्या याद दिलाया?
लेकिन राहुल गांधी अपनी ही धुन में मशगूल हैं। एक बार फिर इंडिया ब्लॉक के नेताओं के साथ राहुल ने मीटिंग की। तय हुआ कि ज्ञानेश कुमार और SIR के खिलाफ जंग जारी रहेगी। राहुल गांधी ने कहा कि वक्त चाहे जितना लगे, वो नरेंद्र मोदी, अमित शाह, ज्ञानेश कुमार और मोहन भागवत के खिलाफ मोर्चा जारी रखेंगे। जवाब में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल से 10 सवाल पूछे। पीयूष गोयल ने बताया कि कैसे कांग्रेस ने अपने समय में एक चीफ इलेक्शन कमिश्नर को गवर्नर बनाया, दूसरे CEC को कैबिनेट मंत्री बनाया, तीसरे मुख्य चुनाव आयुक्त को पार्टी का टिकट दिया, लेकिन आज राहुल गांधी कांग्रेस शासन की करतूतों पर पर्दा डाल रहे हैं।
BJP ने अब राहुल को जवाब देने की रणनीति बदली है। पहले राहुल गांधी चुनाव आयोग पर आरोप लगाते थे, परोक्ष रूप से BJP को corner करते थे लेकिन BJP के बड़े नेता ख़ामोश रहते थे, ये सोचकर कि, वो राहुल को जवाब देंगे तो चुनाव आयोग की वकालत करते नज़र आएंगे। लेकिन पिछले तीन चार दिन से BJP के बड़े नेता अब राहुल गांधी को बिंदुवार जवाब दे रहे हैं। पीयूष गोयल ने कांग्रेस के दोहरे मानदंड का पर्दाफाश किया।
राहुल गांधी ज्ञानेश कुमार पर BJP की मदद करने का आरोप लगाते हैं तो पीयूष गोयल ने टी.एन.शेषन, नवीन चावला और एम.एस.गिल जैसे मुख्य चुनाव आयुक्तों के नाम गिनवा दिए, जिन्हें कांग्रेस ने चुनाव लड़वाया, मंत्री बनाया, राज्यपाल बनाया। पीयूष गोयल ने कांग्रेस के उन नेताओं के नाम भी गिनवा दिए जिन्होंने SIR की मांग की थी और ये भी पूछा कि अगर राहुल गांधी के पास 'वोट चोरी' के प्रमाण हैं तो वो court को क्यों नहीं देते? दरअसल इस तरह के सारे मुद्दों पर संसद में बहस होती तो अच्छा होता लेकिन राहुल गांधी ने सोची-समझी रणनीति के तहत संसद नहीं चलने दी, वरना चुनाव आयोग से जुड़े हर सवाल का जवाब मिल जाता।
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